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Monday, October 29, 2012

AIPWA Team Visited Haryana

पिछले महीने भर में देश की राजधानी के पड़ोसी हरियाणा राज्य में घटी बलात्कार की घटनाओं और उसके बाद तमाम तथाकथित जिम्मेदार राजनीतिक और सरकारी मोर्चों पर डटे सत्ता के ठेकेदारों के इन घटनाओं पर भयानक रूप से अमानवीय बयान अनगिनत सवालों पर तत्काल रूप से सोचने को विवश करते हैं। बलात्कार की संख्या तो चिंता का सबब है ही पर साथ ही इन पर सत्ता और समाज के विविध कोनों से आता इस कदर प्रतिक्रियावादी रवैया 65 वर्षों के लोकतंत्र के हासिल पर ही प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। हाल ही में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की एक टीम ने इन घटनाओं के मद्देनजर हरियाणा का दौरा किया।

A team of leaders and activists of AIPWA and AISA visited Haryana on 12-13 October, to investigate the alarming spate of rape cases in the state. The team comprised of AIPWA National Secretary Kavita Krishnan, JNU Students’ Union Councillor Anubhuti Bara, and AISA activists from Delhi University, Prerna and Saurabh Naruka. The team was accompanied by Comrade Prem Singh Gehlawat, in-charge of the CPI(ML) for Haryana.

Haryana has witnessed a spate of rapes and gang-rapes, many of them targeting women from Dalit and backward communities. There have been 17 such instances in the past one month.

The response of the Government of Haryana, the ruling party, and the main Opposition party, has been shockingly patriarchal and insensitive. Phool Chand Mulana, Chief of Haryana’s ruling party, the Congress, declared that the rapes are a conspiracy against the Government. Haryana DGP R S Dalal said parents need to keep an eye on the activities of their children. And Congress spokesperson Dharmveer Goyat said that 90% of rape cases are consensual. Meanwhile, the khap panchayats suggested child marriage would prevent rape – a sentiment echied by former Haryana CM Om Prakash Chautala. In the name of preventing rape, the khaps and their political patrons are actually pushing child marriage to prevent women from exercising their own choice in marriage – something they otherwise achieve by honour crimes and killings.  

The team visited Banwasa (Gohana), Sacchakheda (Narwana), and Dabra (Hisar) where dalit women had been gang-raped. They visited the affected women and their families, and enquired on the action being taken by the police and other authorities.

The systematic gender and caste oppression– and the failure of the Government to defend the rights of dalits and women, are major factors in the rise in the instances of rapes and dalit atrocities in in Haryana as well as in the rest of the country.

Sunday, October 21, 2012

6th State Conference of UP AIPWA, 29/09/2012

सरकारों के महिला विरोधी रुख के खिलाफ प्रदेश स्तरीय विशाल रैली ऐपवा ने अपने 6ठे राज्य सम्मेलन की शुरुआत प्रदेश में बढ़ते महिला उत्पीड़न के खिलाफ और केंद्र और राज्य में बैठी सरकारों के महिला विरोधी नीतियों के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए एक रैली के रुप में की। यह रैली वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से सम्मेलन स्थल नगर -नगम हॉल, सिगरा तक निकाली गई। रैली में 16 जिलों से 500 से अधिक ऐपवा की महिलाओं ने हिस्सा लिया। रैली का नेतृत्व ऐपवा की राष्ट्रीय महिसचिव मीना तिवारी ने किया। रैली में महिलाओं का केंद्रीय नारा था- नहीं सहेंगे भेदभाव हिंसा और अपमान, लड़कर लेंगे आजादी रोजगार और सम्मान। रैली के समापन के पश्चात नगर-निगम हॉल सिगरा में आयोजित उदघाटन सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि महिलाओं के बुनियादी सवालों पर भले ही राज्य व केंद्र के बीच सत्ता का खेल चल रहा हो पर यह बात साफ है कि दोनों के बीच पितृसत्तात्मक एकता कायम है। यह व्यवस्थाएं महिलाओं को न्याय दिलाने, उनकी हिफाजत करने और उन्हें रोजगार दिलाने के संबंध में अक्षम सबित हुई हैं इसलिये औरतों केा अपनी आजादी, रोजगार और सुरक्षा के अधिकार के लिये एकजुट होकर लड़ना होगा और एक वैकल्पिक महिला आंदोलन खड़ा करना होगा। इस सत्र में बीएचयू से डा. कुमुद रंजंन ने कहा कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां महिला विरोधी हैं, हाल ही में विदेशी खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष पूंजी निवेश के अनुमति देने से सबसे बुरा प्रभाव महिलाओं पर पड़ेगा- कुटीर उद्योग, लघु उद्योगों में लिप्त लाखेां महिलाओं और उनका परिवार संकट में पड़ जायेगा। अपने अध्यक्षीय भाषण में खेत मजदूर संगठन की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में महिला उत्पीड़न में तेजी से वृद्धि हुई है। सपा की सरकार में थाने के अंदर महिलाओं के साथ बलात्कार होता है तो ऐसे दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दिलाने के नाम पर बस उनका निलंबन होता है- यह किसी समाज को शर्मसार कर देने वाले उदाहरण है। उदघाटन सत्र में प्रो. शाहिना रिजवी, विजन संस्था से जागृति रही, डा. मधु कुशवाहा, मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन सिंह ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन ऐपवा की प्रदेश सहसचिव कुसुम वर्मा ने किया। सम्मेलन में 500 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 41 सदस्यीय काउंसिल और 15 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। अहमदी बेगम, जगदम्बा, आरती राय एवं कृपा वर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष और का. ताहिरा हसन को प्रदेश अध्यक्ष और का. गीता पांडे को प्रदेश सचिव बनाया गया। झारखंड से ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव का. सुनीता पर्यवेक्षक के बतौर मौजूद थी। सम्मेलन के अंत में 11 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किये गये। यह प्रास्तव संक्षेप में महिलाओं के लिये विषेष अदालतों के गठन पर, राज्य महिला आयोग के पुर्नगठन पर, खाप पंचायतों के असंबैधानिक फरमानों पर पाबंदी लगाने, लोकसभा और विधान सभा में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने, एफडीआई समेत अन्य महिला विरोधी, मजदूरी विरोधी आर्थिक नीतियों पर पाबंदी लगाने, आशा-आंगनबाड़ी समेत सभी पैरावर्कस के नियमतिकरण, लड़कियों की स्नातक तक की पढ़ाई को मुफत करने, मनरेगा में महिला के नाम से जॉब कार्ड देने, जहरीली और अवैध शराब के ठेके पर पाबंदी लगाने, मजदूर महिलाओं को पुरुषों के बराबर मजदूरी देने और दहेज विरोधी कानून 498-ए में कोई भी तब्दीली न करने संबंधी थे। (प्रस्तुति- कुसुम वर्मा,प्रदेश सह-सचिव एपवा)





Com. Meena Tiwari






March





March

Wednesday, October 3, 2012

AIPWA Condemns Sexist Remark by Union Minister




(AIPWA Statement issued on October 2, 2012) 

Union Minister for Coal Sriprakash Jaiswal who is a Congress MP from Kanpur made a brazenly sexist remark a poetry gathering at a women’s college in Kanpur.
Reacting to news of a cricketing victory, he said, “A new victory is like a new marriage. As time passes the victory will become stale. As time passes the wife becomes stale, she no longer provides the same pleasure.”
This remark is shamefully sexist. Jaiswal’s subsequent ‘apology’ is in fact no apology at all. He has in fact tried to justify his offensive remark by saying it was ‘light-hearted satire and humour that is normal in a kavi sammelan ([poetry gathering),’ while saying he is sorry ‘if he has hurt sentiments of women.’ The very fact that Sriprakash Jaiswal thinks it is ‘humourous’ to refer to wives as though they were commodities to provide pleasure, and which, like commodities, become ‘old’ and replaceable, is what is absolutely offensive. It is offensive not to ‘sentiments of women’, but to democratic principles of gender equality.        
AIPWA demands that the UPA Government immediately strip Jaiswal of his post as Minister. After such a shocking, public insult to the principle of women’s equality and dignity, Jaiswal cannot be allowed to remain a public figure representing the Government.
                                                                                                         Kavita Krishnan,
                                                                                                     National Secretary, AIPWA